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कविता – करते रुदन विलाप हैं पाठन बिन सब छंद

Posted on January 16, 2026

सतीश चन्द्र श्रीवास्तव सीतापुर, उ.प्र. करते रुदन विलाप हैं पाठन बिन सब छंद। लाइक और कमेंट बिन छंद जेल में बंद।। बड़े एक से एक हैं साहित्यिक ग्रुप आज। किंतु एडमिन भी…

वीथिका ई पत्रिका का जनवरी, 2026 अंक ” शिव-शक्ति”

Posted on December 29, 2025

वीथिका ई पत्रिका का जून-जुलाई, 2025 संयुक्तांक “बिहू : ओ मुर अपुनर देश”

Posted on July 6, 2025

वीथिका ई पत्रिका का मार्च-अप्रैल, 2025 संयुक्तांक प्रेम विशेषांक ” मन लेहु पै देहु छटांक नहीं

Posted on April 25, 2025

लोक की चिति ही राष्ट्र की आत्मा है : प्रो. शर्वेश पाण्डेय

Posted on February 25, 2025

प्रसिद्ध भाषाविद, चिंतक, वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय प्रो . शर्वेश पाण्डेय जी, प्राचार्य, डी.सी.एस.के. महाविद्यालय,मऊ से आगामी 27-28 फरवरी, 2025 को डी.सी.एस.के. महाविद्यालय,मऊ के प्रांगण में लोक कलाओं व भोजपुरी पर अखिल भारतीय…

Vithika Feb 2025 Patrika

Posted on February 14, 2025

वीथिका ई पत्रिका पहुंची प्रसिद्ध भाषाविद, चिंतक, वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय प्रो. शर्वेश पाण्डेय जी, प्राचार्य, डी.सी.एस.के. महाविद्यालय,मऊ से मिलने व उनसे लोक साहित्य व राष्ट्र के बारे कुछ सीखने।…..

वीथिका ई पत्रिका सितम्बर 2024 ”

Posted on October 9, 2024

वीथिका_ई_पत्रिका_सितम्बर_2024[1]Download

वीथिका ई पत्रिका अगस्त 2024 ” मनभावन स्वतंत्र सावन”

Posted on August 3, 2024

पर्व विशेष : कविता

Posted on July 17, 2024

अंकुर सिंह हरदासीपुर, चंदवक जौनपुर, उ. प्र भारत पर्वो-त्योहारों का देश है…तपती गर्मी के बाद जब मानसून आता है तो मन झूम उठता है, एक कृषि प्रधान समाज इसी भींगती बारिश के…

कविता – सावन

Posted on July 16, 2024

अश्वनी अकल्पित नई दिल्ली बरसो बरसो सावन देखो आसमान में कारी घटा                                           जैसे गोपियों के आंख में काजल सा घुला बरस-बरस के मन महकाती हो मन को सुखद अनुभूति कराती हो, तरस…

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